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पंकज सुबीर आज के युवा पीढ़ी के चर्चित कथाकारों में से हैं । उनकी कहानियां देश भर की साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं । उनकी एक पुस्तक भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित होकर आ चुकी है । ईस्ट इंडिया कंपनी शीर्षक की इस पुस्तक को ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार के लिये अनुशंसित भी किया गया था ये पिछले वर्ष की चर्चित तथा सराही गई पुस्तकों में से है । उनकी एक कहानी महुआ घटवारिन काफी चर्चित रही है । जिसे आधारशिला तथा नया ज्ञानोदय ने प्रकाशित किया तथा उसके बाद हंस ने उस पर श्री भारत भारद्वाज जी की एक विशेष समीक्षा भी प्रकाशित की । वे मंच के अच्छे कवि हैं तथा देश भर के कवि सम्मेलन के मंचों पर काव्य पाठ कर चुके हैं । ग़ज़ल के व्याकरण को लेकर अपना एक विशेष ब्लाग चलाते हैं जहां नये सीखने वालों को ग़ज़ल की बारीकियों की जानकारी देते हैं ।
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